निराला के काव्य का प्राकृतिक सौंदर्य

Authors

  • Dr. Vandana Sharma Author

Abstract

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हिंदी साहित्य में छायावाद युग के प्रमुख कवि थे, जिनकी कविताओं में प्रकृति और मानवीय भावनाओं का गहन चित्रण मिलता है। उनका काव्य केवल बाह्य सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, संघर्ष, और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक भी है। इस शोधपत्र में निराला की काव्य रचनाओं का सौंदर्यशास्त्रीय विश्लेषण किया गया है, जिसमें उनकी प्रकृति दृष्टि को केंद्र में रखा गया है। निराला की कविताओं में प्रकृति को मानवीकरण के माध्यम से जीवंत और संवेदनशील रूप में प्रस्तुत किया गया है। सरोज स्मृति में प्रकृति व्यक्तिगत वेदना का प्रतीक बनती है, जबकि राम की शक्ति पूजा में यह संघर्ष और विजय का माध्यम है। उनकी कविताओं में प्रतीक और बिंब विधान के माध्यम से प्राकृतिक सौंदर्य को मानवीय अनुभवों से जोड़ा गया है। निराला की प्रकृति दृष्टि केवल सौंदर्यबोध नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना और दार्शनिकता का भी समन्वय है। उनका काव्य आधुनिक हिंदी साहित्य पर गहरा प्रभाव छोड़ता है और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के लिए आज भी प्रासंगिक है। यह शोधपत्र उनके प्रमुख काव्य संग्रहों का विश्लेषण करते हुए उनकी प्रकृति दृष्टि, सौंदर्यबोध, और साहित्यिक प्रभाव को रेखांकित करता है।

Published

2022-01-01

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निराला के काव्य का प्राकृतिक सौंदर्य. (2022). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 11(1), 2447-2464. https://ijfans.org/index.php/Journal/article/view/4940

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