प्रेमचंद युगीं कहानियों में यथार्थ

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  • Dr. Vandana Sharma Author

Abstract

प्रेमचंद, हिंदी साहित्य के यथार्थवादी परंपरा के प्रमुख स्तंभ, ने अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से भारतीय समाज की वास्तविकता को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। उनके साहित्य में वर्ग संघर्ष, गरीबी, शोषण, जातिवाद, और स्त्री-शोषण जैसे मुद्दों का गहन चित्रण मिलता है। यह शोधपत्र प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान और उनकी यथार्थवादी दृष्टि का अध्ययन करता है, जिसमें उनकी प्रमुख कहानियों जैसे "पूस की रात," "ईदगाह," "कफन," और "सद्गति" का विश्लेषण किया गया है। प्रेमचंद की सरल भाषा, संवादात्मक शैली, और प्रतीकों का प्रयोग न केवल उनकी कहानियों को प्रभावशाली बनाता है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का काम भी करता है। उनकी रचनाएँ समाज सुधार का एक सशक्त माध्यम बनती हैं और आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं। इस शोधपत्र में उनके साहित्यिक दृष्टिकोण, यथार्थवादी शैली, और उनकी कहानियों के सामाजिक प्रभाव को रेखांकित किया गया है। साथ ही, प्रेमचंद की लेखनी के माध्यम से आधुनिक साहित्य पर पड़े उनके प्रभाव और उनकी रचनाओं की वर्तमान समाज में प्रासंगिकता को भी विस्तार से समझाया गया है। प्रेमचंद का साहित्य केवल साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का एक प्रेरक माध्यम है।

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2021-01-01

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प्रेमचंद युगीं कहानियों में यथार्थ. (2021). International Journal of Food and Nutritional Sciences, 10(4), 1466-1480. https://ijfans.org/index.php/Journal/article/view/3619

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