शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के शासकीय सहशिक्षा एवं एकल शिक्षा में अध्ययनरत छात्राओं में असुरक्षा की भावना का अध्ययन
Abstract
बच्चे का बेहतर विकास उसके माता-पिता और शिक्षक के हाथों में ही होता है। यदि वह एक संयुक्त परिवार में रहते हैं तो उनके विकास में महत्वपूर्ण योगदान घर के बाकी सदस्यों का भी होता है परंतु महत्वपूर्ण कर्तव्य माता पिता को ही निभाना पड़ता है। ऐसे में माता-पिता को यह ध्यान रखना अति आवश्यक है कि उनके जीवन को कोई भी असुरक्षित असामाजिक तत्व आहत ना कर सके। क्योंकि बच्चों के विकास के दिनों में एक छोटी सी गलती उन बच्चों का आने वाला पूरा भविष्य खराब कर सकती है। यदि एक बार किसी बच्चे के दिलों दिमाग में असुरक्षा की भावना बैठ जाती है तो जीवन पर्यंत उसे उसके दिलो-दिमाग से दूर करना नामुमकिन हो जाता है। हम सभी कभी न कभी असुरक्षा की भावना का सामना करते हैं। छात्राओं की सुरक्षा अपने आप में ही बहुत बड़ा मुद्दा है। पिछले कुछ सालों में महिलाओं के प्रति बढ़ते अत्याचारों को देखकर हम यह तो बिल्कुल नहीं कर सुरक्षित है। महिलाए अपने आपको असुरक्षित महसूस करती है। हमारे देश में महिलाओं को मय में जीना पड़ रहा है, जिसको कम करने के लिए आत्मविश्वास में वृद्धि करना अति आवश्यक है।





