"व्यक्तिव विकास में खो-खो खेल का महत्त्व : एक अध्ययन"
Abstract
आज के आधुनिक युग में जीवन को सक्रिय और ऊर्जावान बनाये रखने में एक व्यवस्थित और समर्थ माध्यम सहजता से प्रयुक्त किया जाता है, जिसे हम आज शारीरिक शिक्षा के नाम से जानते हैं। यह शिक्षा का ऐसा माध्यम है जिससे अभिप्रेरित होकर युवा वर्ग अपनी सहज प्रकृति के अनुरूप सहभागी होकर विभिन्न शारीरिक अनुक्रिया को उनकी विशिष्टता और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ग्रहण करता है। शारीरिक शिक्षा का प्राचीन समय से ही समाज में विशिष्ट स्थान इसकी सामाजिक, भौतिकीय और नैतिकता के विकास के वृहद लक्ष्य के स्वरूप से रहा है





