क्रान्तिकारियों का स्वतन्त्रता आंदोलन में विशेष योगदान एवं आए सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन
Abstract
स्वतन्त्रता के संघर्ष में उग्रदल ने और अधिक अतिवादी होकर देश में आतंक स्थापित करने वाली ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह का वातावरण निर्मित किया क्या संघर्षशील सशस्त्र प्रगति का मार्ग चुना। इस संघर्ष के पीछे निश्चय ही राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक और सामाजिक कारण रहे है जिन्होंने मूल प्रेरक सत्य के रूप में स्वाधीनता संघर्ष को गति प्रदान किया। ब्रिटिश शासन को स्थान-स्थान भारतीय जनता के विरोध का सामना करना पड़ा था जो कार्य स्थानीय राजे-महाराजें नहीं कर सके थे, उन कार्यों को साधारण जनता ने किया था। प्रतिरोध करने वाली साधारण जनता में पर जमीदार, धर्म-परायण तथा समाज के अन्य वर्ग सम्मिलित थे जिनके हितों को ब्रिटिश शासन से आघात पहुँचाया था। वस्तुतः विदेशी प्रभुत्व के आर्थिक शोषण और प्रशासनिक दुर्बलता के जनमानस में तीव्र प्रतिक्रिया को जन्म दिया। परिणामस्वरूप, विदेशी शासन का भारत के विभिन्न भागों में अक्सर विरोध किया जाता रहा।





