भारतीय अर्थव्यवस्र्ा में आर्र्थक ववकास की गततशीलता
Abstract
पिछले दशक के दौरान, भारतीय सेवा क्षेत्र नौ प्रततशत की औसत वापषिक दर से बढा, जिसने अर्व्ि यवस्र्ा की कुल वद्ृधि दर मेंलगभग साठ प्रततशत का योगदान ददया (पवश्व बैंक, 2004)। सेवाओं में अधिकांश वद्ृधि सूचना प्रौद्योधगकी (आईटी), बबिनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीिीओ) सेवाओं और ज्ञान आिाररत गततपवधियों में हुई है; दरूसंचार, पवत्तीय सेवाएँ, सामुदातयक सेवाएँ और होटल और रेस्तरां िैसे अन्य क्षेत्रों में भी काफी वद्ृधि हुई है। बाहरी बाजारों तक िहुंच और घरेलूसुिारों ने भारत में एक गततशील ततृ ीयक क्षेत्र बनाने में महत्विूर्ि भूर्मका तनभाई है । सेवा क्षेत्र ककसी देश के सामाजिक आधर्िक पवकास की िीवन रेखा है। यह आि पवश्व स्तर िर सबसे बडा और सबसे तेिी से बढने वाला क्षेत्र है िो वैजश्वक उत्िादन में अधिक योगदान दे रहा हैऔर ककसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में अधिक लोगों को रोिगार दे रहा है। हाल के वषों में सेवा क्षेत्र अधिक महत्विूर्ि हो गए हैंक्योंकक प्रौद्योधगकी में प्रगतत नेसीमाओं के िार सेवाएं प्रदान करने के नए सािनों की अनुमतत दी है। हाल के ददनों में इस क्षेत्र में उत्िादन में वद्ृधि ज्यादातर सूचना प्रौद्योधगकी और िेशेवर सेवा क्षेत्रों में कौशल गहन सेवाओं के तेिी से पवकास से आई है, िो ज्यादातर बाहरी बािार की ओर उन्मुख हैं।





