हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म : आनंद के कुमारस्वामी
Abstract
चेतना क पयषणा िवषय और िवषयी प म ि िवध होती है। िवषय पयषणा मूलतः दुःख प अतएव हेय तथा याय होती है। इसिलए वाभािवक प से चेतना क िवषयी पयषणा उसका सही एवं उपादेय पयषणा हो जाता है। वतुतः मानिसक िवकप म अथवा उसके िवषय म खोये िबना अपने को खोजना, अनुभव वाह म आभािसत आिमक चेतना का अनुसंधान अथवा पयषणा वा तिवक पयषणा है। इसी आय पयषणा को ेयस अथवा मू यानुसंधान कहा जा सकता है





